मैक्यावली कौन थे, उनके राजनीतिक विचारों का परीक्षण और मूल्यांकन कीजिए | Dharm aur Naytikta Par Makiavalli Ke Vicahar
| मैक्यावली के राजनीतिक चिंतन की आलोचनात्मक व्याख्या करें |
मैकियावली एक विख्यात राजनीतिज्ञ, दार्शनिक , इतिहासकार और साहित्यकार था । उनका जन्म सन् 1469 ई ० में इटली के फ्लोरेंस नगर में हुआ था । सन् 1527 ई ० में मैकियावली की मृत्यु हो गई । मैकियावली ने राजनीतिक दृष्टि से दो महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की द प्रिंस और डिसकोर्सेज । उसके अन्य रचनाओं में युद्ध कला ( Art of War ) फ्लोरिन्स का इतिहास महत्वपूर्ण है । द प्रिंस की रचना 1513 ई ० में हुई थी , लेकिन इसका प्रकाशन मैकियावली की मृत्यु के बाद 1532 में हुआ था । इस ग्रंथ में कुल 26 अध्याय है जो तीन भागों में खण्डित है ।
दार्शनिक और राजनीतिज्ञ के दर्शन और नीतियों पर उसके देशकाल की परिस्थितियों का प्रभाव पड़ता ही है परन्तु मैकियावेली पर अपने समकालीन राजनीतिक , आर्थिक , सामाजिक एवं नैतिक वातावरण की छाप सबसे अधिक उसके विचारों को प्रभावित किया है । उस पर प्रो ० डनिंग का कथन अक्षरशः लागू होता है " यह प्रतिभासम्पन्न फ्लोरेन्सवाली वास्तविक अर्थो में अपने युग का शिशु था । " मैकियावली का युग पुनर्जागरण का युग था और इसी कारण इसे पुनर्जागरण का प्रतिनिधि भी कहा जाता है । मैकियावेली अपेन युग से जितना प्रभावित हुआ उतना बहुत ही कम लेखक अपने युग से प्रभावित होते हैं ।
मैकियावेली ही अपने युग का ऐसा व्यक्ति , दार्शनिक और पर्यवेक्षक है जिसने समकालीन परिस्थितियों का सही और यथार्थ रूप में देखा , उस समय की सामाजिक और राजनीतिक बुराइयों का अनुभव किया और अपनी रचनाओं प्रिंस , डिस्कोर्सेज और युद्धकला में समकालीन परिस्थितियों के विश्लेषण से परिपूर्ण है । सेबाइन ने इस सम्बन्ध में लिखा है कि " उसके युग का कोई भी अन्य व्यक्ति यूरोप के राजनीतिक विकास की दिशा को इतनी स्पष्टता के साथ नहीं देख सका , जितनी स्पष्टता के साथ इसे मैकियावेली ने देखा था . कोई भी अन्य इटली को उतने अच्छे से नहीं जानता था , जितना कि मैकियावेली ।
धर्म और नैतिकता पर मैकियावली के विचार
मैकियावाली के विचार की सबसे प्रमुख विशेषता , जिसके साथ उसका नाम जुड़ा हुआ है , राजनीति को धर्म और नीति के प्रभाव से सर्वथा मुक्त और स्वतन्त्र करना है । मैकियावली की यही विशेषता उसे प्राचीन और मध्यकालीन विचारकों से अलग कर देती है । सोफिस्ट वर्ग के विचारकों के अतिरिक्त यूनानी विचारक सुकरात , अरस्तू , प्लेटो – नैतिक जीवन को बहुत महत्व देते थे और चर्च के विचारकों का तो सम्पूर्ण राजनीतिक चिन्तन ही धर्म से अनुप्राणित था , किन्तु मैकियावली पहला ऐसा विचारक था , जिसने राजनीति को नैतिकता से जान बूझकर -तथा औपचारिक रूप से अलग कर दिया ।
मैकियावली इस बात से इंकार करता है कि भावी जीवन में आनन्द प्राप्त करने के लिए मनुष्य को ईश्वरीय कानून के निर्देश की आवश्यकता है । मैकियावली की धारणा है कि मनुष्य का केवल एक ही लक्ष्य हो सकता है वह है इस जीवन में सुख की प्राप्ति । इस प्रकार मैकियावली मानव जीवन के अन्तिम लक्ष्य के सम्बन्ध में सन्त थामस एक्वीनास और इसाई धर्म के अन्य विचारकों की धारणा का खण्डन करता है ।
मैकियावली के अनुसार राज्य के द्वारा अपने को एकीकृत करने और शक्तिशाली बनाने के लिए आवश्यकतानुसार सभी प्रकार के साधन अपनाए जा सकते हैं । वह कहता है , " राजा को राज्य की सुरक्षा की चिन्ता करनी चाहिए , साधन तो सदैव रूप से प्रशंसा ही की जाएगी । " मैकियावली की धारणा है कि राज्य की सुरक्षा और कल्याण के मार्ग में नैतिक विचारों को बाधित नहीं होने देना चाहिए और नैतिक के चक्कर में न पढ़कर आवश्यकतानुसार सभी प्रकार के साधन अपना लिए जाने चाहिए । वह लिखता है- " प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि राजा के लिए अपने वचन का पालन करना और नीतिपूर्वक आचरण करना कितना प्रशंसनीय है तथापि हमारी आंखों के समक्ष जो कुछ घटा है उसमें हम देखते हैं कि केवल उन्हीं राजाओं ने महान कार्य किए हैं जिन्होंने चालाकी से दूसरों को पीछे छोड़ दिया और अन्त में उससे अधिक सफल सिद्ध हुए । इसलिए बुद्धिमान शासक को अपने वचन का पालन करना चाहिए ।
एक अन्य स्थान पर मैकियावली लिखता है " न तो कोई प्राकृतिक कानून है और न ही सार्वभौम रूप में स्वीकृत कोई अधिकार । जनीति को नैतिकता से पूर्णता स्वतन्त्र करना चाहिए । साध्य ही साधनों का औचित्य है ।
उपर्युक्त दृष्टिकोण के आधार पर मैकियावली लिखता है कि राजा को ऊपर दयालु , विश्वासी , धार्मिक , और सच्चा होने का ढोंग करते हुए आवश्यकता पड़ने पर निर्दयी और अधार्मिक बनने पर तत्पर रहना चाहिए । वह धोखा और ढोंग राजा के लिए जरूरी समझता है । उसका विचार है कि " छल कपट को जानने के लिए लोमड़ी और भेड़ियो को डराने के लिए शेर होना चाहिए । " इस प्रकार मैकियावली राजनीतिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सभी साधनों को अपनाना उचित ठहराता है और अपने नरेश को आवश्यकतानुसार नैतिक - अनैतिक सभी साधन अपनाने का परामर्श देता है ।
राजनीतिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अनैतिक और अधार्मिक कार्यों का समर्थक होने पर भी वह राजनीतिक क्षेत्र में धर्म की उपयोगिता को स्वीकार करता है । उसकी दृष्टि में राज्य में धर्म की महत्ता इसलिए है कि धर्म सभ्य जीवन का आधार है । व्यक्ति अनेक बार राज्य के कानूनों की अवज्ञा कर देते है
किन्तु धार्मिक नियमों को ईश्वरीय आदेश मानकर उसका पालन करते हैं । इस प्रकार मैकियावली शक्ति के साथ - साथ धर्म को साम्राज्य के रूप में स्वीकार करता है । नैतिक और धार्मिक भावनाओं का आदर मैकियावली वहीं तक करता है , जहां तक वे राज्य की शक्ति और हित के महत्वपूर्ण साधन हो ।
मैकियावेली की राज्य सम्बंधी अवधारणा
मैकियावेली के विचार की सबसे प्रमुख विशेषता , जिसके साथ उसका नाम जुड़ा हुआ है , राजनीति को धर्म और नीति के प्रभाव के सर्वथामुक्त और स्वतन्त्र करना है । मैकियावेली की यही विशेषता उसे प्राचीन और मध्यकालीन विचारकों से अलग कर देती है । मैकियावेली पहला ऐसा विचारक था जिसने राजनीति को नैतिकता से जान बूझकर तथा औपचारिक रूप से अलग कर दिया ।
मैकियावेली की धारणा है कि मनुष्य का केवल एक ही लक्ष्य हो सकता है और वह है इस जीवन में सुख की प्राप्ति । इस प्रकार मैकियावेली मानव जीवन के अंतिम लक्ष्य के सम्बन्ध में सन्त थामस एक्वीनास और इसाई धर्म के अन्य विचारकों की धारणाओं का खण्डन करता है । मैकियावेली के अनुसार राज्य के द्वारा अपने को एकीकृत करने और शक्तिशाली बनाने के लिए आवश्यकतानुसार सभी प्रकार के साधन अपनाये जा सकते हैं । वह कहता है कि " राजा को राज्य की सुरक्षा की चिन्ता करनी चाहिए , प्रशंसा ही की जायेगी
मैकियावेली लिखता है कि " न तो कोई प्राकृतिक कानून होता है और न ही सार्वभौम रूप में स्वीकृत कोई अधिकार । राजनीति को नैतिकता से पूर्णतया स्वतन्त्र करना चाहिए । साध्य ही साधनों का औचित्य है । " उसका विचार है राजा को उपर से दयालु , विश्वासी , धार्मिक और सच्चा होने का ढ़ोग करते हुए आवश्यकता पड़ने पर निर्दयी , विश्वासघाती और अधार्मिक बनने को तत्पर रहना चाहिए । वह धोखा और ढोग राजा के लिए जरूरी समझता है । " छल कपट को जानने के लिए राजा को लोमड़ी और भेड़िये को डराने के लिए शेर होना चाहिए ।
" इस प्रकार मैकियावेली राजनीतिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सभी साधनों को अपनाना उचित ठाहराता है और अपने नरेश को आवश्यकतानुसा नैतिक - अनैतिक सभी साधनों को अपनाने का परामर्श देता है ।
मैकियावेली के द्वारा राजनीति का नीति से जो सम्बन्ध विच्छेदन किया है वह निम्न है
( 1 ) यूनानी दार्शनिकों की भांति वह राज्य को सर्वश्रेष्ठ ओर सर्वोच्च संगठन मानता है और उसका विचार है कि राज्य के हित व्यक्तिगत हितों से उच्च और महत्वपूर्ण होते हैं । इसीआधार पर वह कहता है कि " जब राज्य की सुरक्षा संकट में हो तो इस बात का कोई विचार नहीं करना चाहिए कि क्या न्यायपूर्ण है और क्या अन्यायपूर्ण , क्या दयालुपूर्ण है और निर्दयतापूर्ण है , क्या गौरवपूर्ण है और क्या निर्लज्जतापूर्ण । "
( 2 ) दूसरा कारण उसका यथार्थवादी दृष्टिकोण है । शासन कार्य से प्रत्यक्ष रूप में सम्बन्धित होने के कारण उसने स्वयं यह देखा था कि शासकगण आन्तरिक प्रशासन और वैदेशिक सम्बन्धों के संचालन में सदैव ही नैतिक - अनैतिक , सभी साधनों को अपनाते रहे हैं । अतः उसने राजनीति में नैतिकता का उपदेश देना व्यर्थ समझा ।
( 3 ) उसकी मानव प्रकृति के सम्बन्ध में विशिष्ट धारणा है । वह मनुष्य को घोर स्वार्थी मानता है और उसका विचार है कि मनुष्यों पर प्रेम के स्थान पर भय से ही शासन किया जा सकता है । अतः वह राजा को आतंकपूर्ण मार्ग अपनाने का परामर्श देता है ।
( 4 ) उसके द्वारा शक्ति को और वीर पुरुषों को अत्यधिक महत्व देना है । मैकियावेली शक्तिशाली व्यक्ति को वन्दनीय समझता है और शक्ति प्राप्त करने के लिए प्रत्येक उपाय का प्रयोग करना उचित उसके इस दृष्टिकोण के कारण धार्मिक और नैतिक प्रभाव से पूर्णतया मुक्त राजनीति का जन्म हुआ ।
राजनीतिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अनैतिक और अधार्मिक कार्यों का समर्थक होने पर भी वह राजनीतिक क्षेत्र में धर्म की उपयोगिता को स्वीकार करता है । उसकी दृष्टि में धर्म की महत्ता इसलिए है कि धर्म सभ्य जीवन का आधार है । व्यक्ति अनेक बार राज्य के कानूनों की अवज्ञा कर देते हैं , किन्तु धार्मिक नियमों को ईश्वरीय आदेश मानकर उसका पालन करते हैं । मैकियावेली का सुझाव है कि राजा को ऐसे गुणों से विभूषित प्रकट होना चाहिए , जो कि अच्छे मनुष्य को लक्षण माने जाते है । उसके द्वारा धर्म को धारण करने का प्रपंच अवश्य ही रचा जाना चाहिए । अपने ग्रन्थ डिस्कोर्सेज में लिखता है "
जो राजा और गणराज्य अपने आपको भ्रष्टाचार से मुक्त रखना चाहते हैं , उन्हें सबसे पहले समस्त धार्मिक संस्कारों की विशुद्धता को सुरक्षित रखना चाहिए और उनके प्रति उचित श्रद्धाभाव रखना चाहिए , क्योंकि धर्म की हानि होते हुए देखने से बढ़कर किसी देश के विनाश का कोई लक्षण नहीं है । इसी प्रकार उसका विचार है कि " धार्मिक संस्थाओं का पालन गणतन्त्रों की महत्ता का कारण है और इन संस्थाओं की अवहेलना राज्य के विनाश को जन्म देती है ।
इस प्रकार मैकियावेली शक्ति के साथ साथ धर्म को -साम्राज्य के आधार के रूप में स्वीकार करता है , किन्तु धर्म के सम्बन्ध में उसका दृष्टिकोण पूर्णतया उपयोगितावादी है । नैतिक तथा धार्मिक भावनाओं का आदर मैकियावेली वहीं तक करता है जहां तक वे राज्य की शक्ति और हित के महत्वपूर्ण साधन हो ।
धर्म और राजनीति के सम्बन्ध में मैकियावेली द्वारा जो धारणा अपनायी गयी है यथार्थवादी दृष्टिकोण से उसकी प्रशंसा की जानी चाहिए । मैकसी ने इस सम्बन्ध में लिखा है राजनीति का नैतिकता से विच्छेद और सामयिकता के नियम को राजनीति की कला का निर्देशक तत्व बनाना मैकियावेली का अनगढ़पन था . लेकिन यह राजनीति विज्ञान के प्रति एक अत्यन्त मूल्यवान सेवा थी ।
" राजनीति विज्ञान में मैकियावेली को उसके अनैतिक सिद्धान्तों के कारण धूर्तता , मक्कारी और छल कपट का प्रतीक माना जाता है किन्तु वास्तव में उसने अपनी पुस्तक में वे ही बातें लिखी हैं जो शासक लोग हमेशा करते रहे हैं । उसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उसने तत्कालीन राजनीतिक जीवन का • यथार्थवादी दृष्टिकोण से सूक्ष्म विश्लेषण करनते हुए शासकों के उन कुकृत्यों को खोलकर रख दिया , जिन पर अब तक पर्दा पड़ा हुआ था । गैटल ने उसे पहला यथार्थवादी विचारक
मैकियावली की मानव स्वभाव सम्बंधी विचार :
मैकियावली ने मानव स्वभाव को पतित और विकृत बताया । उसके अनुसार मनुष्य उष्कृतज्ञ , चंचल , धोखेबाज , धन का लालची तथा संकट से बचने वाला होता है । मैकियावली ने मानव प्रकृति या स्वभाव के बारे में प्रिंस तथा डिसकोर्सेज ' में समान विचार दिए हैं । मैकियावली के मत में मनुष्य का जन्म से ही दुष्ट और स्वार्थी होता है । वह लोभी होता है उसमें कायरता और विश्वासघात के दुर्गुण होते हैं । वह कहता है कि " मनुष्य अपनी पैतृक सम्पत्ति की हानि की तुलना में अपने पिता की मृत्यु को अधिक सरलता से भूल जाता है ।
" मैकियावली के राज्य और समाज में संघर्ष , प्रतियोगिता , शत्रुता और युद्ध का कारण मानव स्वभाव को बतलाया है । उसके शब्दों में कुछ मनुष्य अधि क सम्पत्ति प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं जबकि दूसरे मनुष्य अपनी सम्पत्ति के छिन जोने के भय से ग्रस्त रहते हैं । इन बातों से शत्रुता बढ़ती है और युद्ध होते हैं । मैकियावली के शब्दों में " मनुष्य स्वभाव से ही दुष्ट और स्वार्थी होते हैं , वे केवल विवश होकर सद्व्यवहार करते हैं । इस प्रकार हम देखते हैं कि मैकियावली ने मनुष्य के स्वभाव या प्रकृति के संबंध में निराशावादी विचार दिए हैं ।
मैकियावली के आदर्श शासक विषयक विचार :
मैकियावली ने अपने ग्रंथ प्रिंस ' के तीसरे भाग में राजा के कर्त्तव्य , उद्देश्य और आचरण पर विस्तृत प्रकाश डाला है । उससे उसके राज्य दर्शन में एक आर्दश शासक का चित्र उभरता है । मैकियावली का आदर्श राजा लोमड़ी की चालाकी और शेर की शूरता ग्रहण करके राज्य की शक्ति सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि करता है । इस प्रकार मैकियावली का आदर्श शासक प्लेटो के आदर्श शासक से सर्वधा भिन्न है । उसे शैतान का प्रतिरूप कहा जाय तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि वह अतातथी , निष्ठुर और हृदयहीन है ।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
1. किस विचारक को अपने युग का शिशु कहा जाता है ?
( A ) um ( B ) प्लेटो ( C ) मैकियावली ( D ) थामस एक्वीनास
2. आधुनिक राजदर्शन का जनक किसे माना जाता है ?
( A ) मैकियावली ( B ) हाब्स ( C ) बोंदा ( D ) थामस एक्वीनास
3. मैकियावली की महानतम कृति का नाम है-
( A ) द प्रिन्स ( C ) पालिटिक्स ( B ) लॉज ( D ) लेवियाथन
4. मैकियावली का जन्म कब हुआ था ?
( A ) 1496 ( B ) 1439 ( C ) 1469 ( D ) 1470
5. मैकियावली का जन्म कहाँ हुआ था ?
( A ) एथेन्स ( B ) इटली ( C ) यूनान ( D ) फ्रांस
6. " द आर्ट आफ वार किसकी रचना है ?
( B ) बेन्थम ( A ) हास ( C ) मैकियावली ( D ) रूसो
7. " द प्रिन्स की रचना कब हुई थी ?
( A ) 1513 ई ० ( B ) 1531 ई ० ( C ) 1315
8. " द प्रिंस का प्रकाशन वर्ष है ?
( A ) 1532 ई o ( B ) 1525 ई ० ( C ) 1527 ( D ) 1351 ई ०
( C ) 13 10. शासकों के निर्देशन ( A ) द आर्ट आफ वार ( C ) द प्रिंस M वर्ष है ? ( B ) 1525 ई ० ( C ) 1623 ई ० ( D ) 1527 30
9. "The Prince" में पुरे कितने अध्याय होते है ?
( A ) 26 ( B ) 20 ( C ) 13 ( D ) 10
10. शासकों के निर्देशन हेतु एक नियम पुस्तक है ?
( A ) द आर्ट आफ वार ( B ) डिसकोर्सज ( C ) द प्रिंस ( D ) लॉज
11. अच्छे मनुष्य इसाई धर्म के चलते अत्याचारी और अन्यायी मनुष्यों के शिकार हो गए है । ?
( B ) बौदा ( A ) मैकियावली ( C ) एक्विनास ( D ) मासिलियो
12. " मनुष्य अपनी पैतृक सम्पत्ति की हानि की तुलना में अपने पिता की मृत्यु को अधिक सरलता से मूल् जाता है । " किसका कथन है ?
( A ) थामस एक्वीनास ( B ) बेंथम ( C ) मैकियावली ( D ) ग्रीन
13. किसने कहा कि " मनुष्य स्वभाव से ही दुष्ट और स्वार्थी होते हैं , वे केवल विवश होकर सद्व्यवहार करते हैं । ?
( A ) प्लेटो ( B ) मैकियावली ( C ) रूसो ( D ) बोंदा
14. किसने कहा कि " सभी मानव कार्य गतिशील है और उनका रूकना असंभव है । ?
( A ) मैकियावली ( B ) एक्वीनास ( C ) प्लेटो ( D ) अरस्तू
15. किसके अनुसार " राजा में शेर और लोमड़ी ' दोनों के गुण होने चाहिए । ?
( A ) प्लेटो ( B ) बेंथम ( C ) बोंदा ( D ) मेकियावली
16. मैकियावली के अध्ययन पद्धति की विशेषता है
( A ) अनुभववाद और इतिहासवाद
( B ) विवेक और विश्वास ( C ) निगमनात्मक
( D ) व्यवहारवाद और उत्तरव्यवहारवाद
17. अपनी सम्पत्ति छीनेने वाले की अपेक्षा एक व्यक्ति अपने पिता के हत्यारों को अधिक सुमगता से क्षमा कर देता है । " यह कथन है
( A ) प्रधो ( B ) प्लेटो ( C ) बोंदा ( D ) मैकियावली
18. समाज के विधायक या कानून निर्माता की आवश्यकता प्रतिपादित करने वाला विचारक है ?
( A ) मेकियावली ( B ) बोंदा ( C ) प्लेटो ( D ) एक्वीनास ( E ) मार्सीलियो
19. मैकियावली के अनुसार ?
( A ) साधन ही साध्य का औचित्य है
( B ) जिसकी लाठी उसकी भैंस
( C ) साध्य की साधना का औचित्य है
20. मैकियावली ने किन दो प्रकार विस्तार से वर्णन किया है ?
( A ) कुलीन तंत्र एवं प्रजा तंत्र
( B ) कुलीन तंत्र एवं राजतंत्र
( C ) तानाशाही एवं राजतंत्र
( D ) राजतंत्र एवं गणतंत्र
21. नैतिकता को राजनीति से अलग करने वाला विचारक ?
( A ) मैकियावली ( B ) लॉक ( C ) रूसो ( D ) बोंदा )
22. किसने कहा कि " बुद्धिमान शासक व्यक्ति की हत्या भले ही कर दे , पर उसकी सम्पत्ति को न लूटें । ?
( A ) बोंदा ) न ( B ) मैकियावली ( C ) एक्वीनास ( D ) कार्लमार्क्स
23. मैकियावेली के अनुसार विधि का स्रोत है :
( A ) समाज ( B ) राजा ( C ) चर्च ( D ) जनता
" 24. किसने कहा कि “ मैकियावेली अपने युग का श्रेष्ठनिचोड़ है
( A ) डब्ल्यू टी . जोन्स ( B ) लॉक ( C ) हॉब्स ( D ) लास्की
25. जिस राजनीतिक दार्शनिक ने सर्वप्रथम राजनीतिशास्त्र में आधुनिक राज्य की अवधारणा को प्रस्तुत किया , वह था :
( A ) प्लेटो ( B ) अरस्तू ( C ) मैकियावली ( D ) हॉब्स
26. कौन बताया था कि " Makiavalli अपने युग का kiddy रहा करते थे " ?
( A ) सेबाइन ( B ) डनिंग ( C ) फॉस्टर ( D ) दान्ते
27. " हिस्ट्री ऑफ फ्लोरेंस " पुस्तक के लेखक कौन हैं ?
( A ) मैकियावली ( B ) ऑस्टिन ( C ) हॉब्स ( D ) एक्वीनास
28. मैकियावेली को प्रथम आधुनिक राजनीतिक विचारक क्यों माना जाता है ?
( A ) राजनीति से नीतिशास्त्र और धर्म को अलग रखने के कारण
( B ) राष्ट्र राज्य अग्रदूत के रूप में
( C ) पुर्नजागरण के प्रतिनिधित्व के कारण
( D ) उपरोक्त सभी
29. पुनर्जागरण का प्रतिनिधि है :
( A ) ग्रोशस ( B ) हॉब्स ( C ) ग्रोशस ( D ) मैकियावली
30. राज्य ' शब्द का आधुनिक अर्थ में प्रथम बार प्रयोग किया गया था :
( A ) अरस्तू द्वारा ( B ) मैकियावेली द्वारा ( C ) हॉब्स द्वारा ( D ) टी ० एच ० ग्रीन द्वारा
31. किसका यह विश्वास था कि व्यक्ति अपने पिता की मृत्यु को भूल सकता है परंतु उसकी संपत्ति की हानि को नहीं ?
( A ) मैकियावेली ( B ) बोंदा ( C ) हॉब्स ( D ) गांधी
32. तुलनात्मक राजनीति का प्रथम अग्रगामी विचारक कौन था ?
( A ) प्लेटो ( B ) अरस्तू ( C ) मैकियावेली ( D ) लॉक
33. राजनीतिक चिंतन के इतिहास में पुनर्जागरण का अग्रदूत किसे कहा जाता है ?
( A ) हॉब्स ( B ) अरस्तू ( D ) मैकियावेली ( C ) लॉक
34. मैकियावेल के ' लेखो ' के सम्बन्ध में कौन - सा सही है ?
( A ) डिसूकोर्सेस ( B )the golden aej ( C ) द आर्ट ऑफ वार ( D ) ये सभी ,
35. यह किसने कहा कि प्रिंस " सबसे पहली महान रचना है,जिसमें मध्ययुगीन चिन्तन प्रणाली का परित्याग किया गया है ?
( A ) मैक्सी ( B ) फॉस्टर ( C ) सेवाइन ( D ) डनिंग
36. " द प्रिंस " के लेखक कौन है ?
( A ) सेबाइन ( B ) कोकर ( C ) मैकियावेली ( D ) लॉक
37. राज्य किसी नैतिकता को नहीं जानता । जो कुछ वह करता है वह न तो नैतिक है और न तो अनैतिक , प्रत्युत वह नैतिकता रहित हैं- किसका कञ्चन है ?
( A ) मैकियावेली ( B ) कौटिल्य ( C ) हॉब्स ( D ) लॉक
38. इटली के नैतिक अपकर्ष के लिए मैकियावेली ने किसे दोष दिया ?
( A ) राजकुमार ( B ) अभिजात तन्त्र ( C ) भ्रष्ट जनता ( D )चर्च
39. “ डिकॉसेंज " पुस्तक के लेखक कौन हैं ?
( A ) हीगल ( B ) मैकियावेली ( C ) बेंथम ( D ) लेनिन
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