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हास्य व्यंग्य का मतलब क्या है | कला की विशेषता क्या है | Homour , Ridicule and Art

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  हास्य व्यंग्य विचार | कला समाज का एक प्रतिबिंब बताएं कि यह कैसे हिंदी में इतिहास लिखने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है? हास्य व्यंग्य एवं कला ( Homour , Ridicule and Art ) महत्वपूर्ण बिन्दु परिहास - सामाजिक नियंत्रण की स्थापना में परिहास की भूमिका महत्वपूर्ण है । मानव सभ्यता के सम्पूर्ण इतिहास में ऐसा कोई भी समय नहीं मिलता , जब परिहास के द्वारा व्यक्तिगत व्यवहारों पर नियंत्रण न रखा गया हो । वास्तव में परिहास का तात्पर्य किसी समाज विरोधी व्यवहार की स्थिति में सांस्कृतिक मूल्यों के संदर्भ में व्यक्ति की हँसी या उसकी आलोचना करना है ।  सामाजिक नियंत्रण में परिहास का महत्व -   बोगार्डस ने सामाजिक नियंत्रण में परिहास को उतना ही महत्वपूर्ण स्थान दिया है जितना की धर्म और लोकाचारों को । इस दृष्टि से परिहास की भूमिका को निम्न क्षेत्रों में स्पष्ट करके इसके महत्व को समझा जा सकता है -  ( 1 ) असामाजिक तत्वों पर नियंत्रण - प्रत्येक समाज में कुछ व्यक्ति या समूह ऐसे कार्य करते हैं जो ऊपर से कानूनों के विरोधी न होने पर भी समाज की परम्पराओं , मूल्यों और समूह कल्याण के लिए हानिकारक...

प्रचार किसे कहते हैं | प्रोपेगेंडा का मतलब क्या होता है | India against propaganda Meaning in hindi

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  प्रोपेगेंडा किसे कहते हैं प्रचार ( Propaganda ) महत्वपूर्ण बिन्दु अँग्रेजी के Propaganda ' शब्द का हिन्दी अनुवाद प्रचार है । स्वयं ' कल्पना ' भी लैटिन भाषा के ' Propaganda ' शब्द से बना है जिसका अर्थ है उगाना , बढ़ाना या विकास करना । इस अर्थ में प्रचार ऐसा कृत्रिम तरीका है जिसके द्वारा हम किसी वस्तु या विचार को जान - बूझकर उत्पन्न करते हैं , उसे आगे बढ़ाते हैं , फैलाते हैं ।  मनोवैज्ञानिक विधि कौन सी है? प्रचार एक मनोवैज्ञानिक विधि है जिसका उद्देश्य लोगों के विचारों , विश्वासों , मनोवृत्तियों एवं व्यवहारों को प्रभावित कर एक निश्चित दिशा की ओर मोड़ने का प्रयत्न किया जाना है । प्रचार उसी वस्तु का होता है जिसके लिए विकल्प मौजूद हो । प्रचार सदैव ही उपयुक्त नहीं होता है । कभी - कभी इसमें निरर्थक बातों का भी प्रतिपादन किया जाता है ।  प्रचार का मनोविज्ञान  ( Psychology of Propaganda ) ( 1 ) उद्देश्य या प्रेरणा ( 2 ) प्रतीकात्मक सामग्री । ( 3 ) सुझाव । ( 4 ) सामान्यीकरण । मनोवैज्ञानिक विधि कौन सी है?   प्रचार की मनोवैज्ञानिक विधियाँ ( Psychological Tech niques ...

पुरस्कार और दंड क्या है | अपराध के शास्त्रीय सिद्धांत के प्रणेता कौन है | type of punishment

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  भारत के पुरस्कार \ दंड के प्रमुख सिद्धांतों की व्याख्या कीजिए पुरस्कार एवं दण्ड ( Reward and Punishment ) महत्वपूर्ण बिन्दु  समाज में नियंत्रण बनाये रखने में पुरस्कार एवं दण्ड की महत्वपूर्ण भूमिका है । फिचर के अनुसार , " पुरस्कार का अर्थ किसी भी ऐसी वस्तु या घटना से है जो कि सीखने के लिए प्रयत्न करने वाले व्यक्ति की प्रतिक्रिया को सरल बनाती है या शक्ति प्रदान करती है । " जॉनसन ने भी पुरस्कार को समाजीकरण की सहमति का सूचक माना है  पुरस्कार के प्रकार  प्रमुखतः पुरस्कार दो रूपों में दिये जाते हैं-  ( 1 ) भौतिक पुरस्कार ,  ( 2 ) अभौतिक पुरस्कार ,  पुरस्कार एवं सामाजिक नियंत्रण इनमें से कौनसा सामाजिक नियंत्रण का औपचारिक साधन है? पुरस्कार सामाजिक नियंत्रण का एक अनौपचारिक साधन है , जो लोगों को नियंत्रण में रहने की प्रेरणा देते हैं । रोज के अनुसार , " दण्ड अधिक स्पष्ट होते हैं किन्तु पुरस्कार के अधिक संख्या में अधिक व्यापक तथा लम्बे समय में अधिक प्रभावशाली होने की सम्भावना होती है ।  सामाजिक नियंत्रण क्यों आवश्यक है   दण्ड- सामाजिक नियंत्रण के ...

भारत में कानून व्यवस्था की रूपरेखा | प्रथा कितने प्रकार के होते हैं ( Practice and law )

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  प्रथा और कानून ( Custom and Law ) महत्वपूर्ण बिन्दु Pratha Shabd Ka Prayog Aisee Janareetiyon Ke Lie Hota Hai , Jo Samaaj Mein Bahut Samay Se Prachalit Hain . । " मैकाइवर एवं पेज के अनुसार , “ सामाजिक मान्यता प्राप्त व्यवहार ही समाज की प्रथाएँ हैं । "   प्रथा की विशेषताएँ  ( 1 ) प्रथाएँ लिखित एवं अनियंत्रित होती हैं ।  ( 2 ) प्रथाएँ वे जनरीतियाँ हैं जो पीढ़ी - दर - पीढ़ी हस्तान्तरित होती हैं ।  ( 3 ) प्रथाओं को समाज की स्वीकृति प्राप्त होती है ।  ( 4 ) प्रथाओं के उल्लंघन पर समाज द्वारा प्रतिक्रिया व्यक्त की जाती है ।   प्रथाओं के स्थायित्व के कारण प्रश्न उठता है कि लोग प्रथाओं का पालन क्यों करते हैं , उनकी उपयोगिता का क्या महत्व है । समाज में उनके स्थायित्व के क्या कारण हैं , इनके पीछे कौन - सी शक्तियाँ हैं ? इन प्रश्नों का उत्तर निम्नलिखित आधारों पर दिया जा सकता है  ( 1 ) प्रथाओं का पालन करना लोग अपना कर्त्तव्य समझते हैं । ( 2 ) प्रथाओं का पालन करने पर व्यक्ति अपने आप को सुरक्षित समझते हैं ।  ( 3 ) प्रथाएँ समूह अथवा समाज के...

सामाजिक परिवर्तन की विशेषताएं | Saamaajik Parivartan Kee Prakriya

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  निम्न में से कौन भारत में सामाजिक परिवर्तन का कारक नहीं है सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रियाएँ ( Processes of Social Change ) महत्वपूर्ण बिन्दु  उद्विकास ( Evaluation ) - किसी भी वस्तु के बाहर की और फैलने को उद्विकास कहते हैं । मैकाइवर एवं पेज लिखते हैं , " जैव There is not only continuity in change but there is also a direction of change, so by such change we mean evolution. , तो ऐसे परिवर्तन से हमारा तात्पर्य उद्विकास से होता है । " मैकाइवर ने उद्विकास को आन्तरिक शक्तियों द्वारा होने वाला परिवर्तन कहा है ।   उद्विकास की विशेषताएँ  उद्विकास की अवधारणा को उसकी विशेषताओं के आधार पर और अधिक स्पष्ट किया जा सकता है  ( 1 ) udvikaas sadaiv saralata se jatilata kee or hota hai- praarambh mein kisee vastu ya praanee ke ang ghule - mile evan dhundhale hote hain  , धीरे - धीरे उनमें अन्तर स्पष्ट होने लगता है , वे पृथक् हो जाते हैं तथा उनका स्वरूप भी निश्चित हो जाता है । उदाहरण के लिए प्रारम्भ में भ्रूण एक माँस का पिण्ड होता है , धीरे - धीरे उसके हाथ , पाँव , ना...

भारतीय जनमत संग्रह करने की भूमिका किसकी थी | Referendum is the specialty of which country

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  जनमत ( Public Opinion ) महत्वपूर्ण बिन्दु जनमत - किसी एक ही विषय पर समान रुचि रखने वाले लोगों के असंगठित समूह को ' जन ' कहते हैं और एक विषय से सम्बन्धित व्यक्तियों द्वारा अपने निर्णय को ' मत ' कहते हैं । इस प्रकार जनमत किसी विषय पर अभिव्यक्ति है अर्थात् जनमत है ।    वी . वी . अकोलकर के अनुसार , " जनमत से तात्पर्य विचारों के उस समूह से है जो किसी समस्या पर जनता रखती एवं व्यक्त करती है । '  जार्ज एटबरी के अनुसार , " जनमत समस्त जनता के निर्णयों के रूप में समझा जाता है । "  जनमत की विशेषताएँ ( 1 ) जनमत कोई स्थिर धारणा नहीं है ,  ( 2 ) जनमत समूह या समाज की उपज है ,  ( 3 ) जनमत किसी एक ही महान व्यक्ति का मत नहीं है ,  ( 4 ) जनमत का निर्माण पारस्परिक वाद - विवाद एवं विचार - विमर्श के द्वारा होता है ।  जनमत निर्माण की प्रक्रिया  किम्बाल यंग ने जनमत निर्माण की प्रक्रिया के चार स्तरों का उल्लेख किया है-  ( 1 ) कोई समस्या या विषय ।  ( 2 ) प्रारम्भिक छानबीन सम्बन्धी विचार - विमर्श  ( 3 ) सार्वजनिक वाद - विवाद ।  ( 4 ) एकमत्य...

सामाजिक परिवर्तन का रेखीय सिद्धांत | What is the cause of social change

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सामाजिक  परिवर्तन  क्या है इसके प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन कीजिए  समाजिक परिवर्तन के सिद्धान्त ( Theories of Social Change ) महत्वपूर्ण बिन्दु , सामाजिक परिवर्तन के जैविकीय सिद्धान्त - सामाजिक परिवर्तन से सम्बन्धित तीन जैविकीय सिद्धान्त प्रमुख हैं-  ( 1 ) वंशानुक्रमण का सिद्धान्त ,  ( 2 ) प्राकृतिक प्रवरण का सिद्धान्त ,  ( 3 ) सावयवी विकास का सिद्धान्त ।   वंशानुक्रमण का सिद्धान्त  वंशानुक्रमण एक प्राणीशास्त्रीय तथ्य है , जिसका अध्ययन ' जनन विद्या ' के द्वारा किया जाता है । जनन विद्या के आधार पर ही हम व्यक्ति के विभिन्न शारीरिक गुणों का अध्ययन करते हैं ।  प्राकृतिक प्रवरण का सिद्धान्त प्राकृतिक प्रकरण का सिद्धान्त केवल भौतिक पर्यावरण से अनुकूलन नहीं कर सकने की स्थिति में ही लागू नहीं होता , बल्कि उन प्राणियों पर भी लागू होता है , जो सीमित साधनों की उपलब्धता के कारण अपनी जीविका सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर पाते हैं । ऐसे प्राणियों का निरसन हो जाता है । स्पष्ट है कि प्राकृतिक प्रवरण के सिद्धान्त तथा अस्तित्व के संघर्ष में योग्यतम प्...